Friday, December 08, 2006

सेक्स की पहली अनुभूति

सेक्स का पहला अनुभव या ज्ञान गाहे बगाहे ज्यादातर लोगों को किशोरावस्था या उसके पहले ही हो जाता है. यह अलग बात है तब उसे इसकी जानकारी नहीं होती. जैसे कि कहा जाता है कि बच्चे की पहली पाठशाला उसका अपना घर परिवार होता है. इसी से स्पष्ट हो जाता है कि सेक्स का पहला ज्ञान भी उसे घर परिवार से ही मिलता है. सेन्टर फॉर इफेक्टिव पैरेन्टिंग के द्वारा किये गए सर्वे से निकले निष्कर्ष के आधार पर बच्चा सर्वप्रथम सेक्सुअलिटी के बारे में अपने अभिभावक से ही सीखता है. भले उसके अभिभावक उससे चर्चा करें या न करें. वे सेक्स की सीख अपने अभिभावक/माता-पिता के बीच व्यवहार देख कर , उनकी आपसी चर्चा सुनकर और सेक्सुअल व्यवहार और संदेश पर अपने माता-पिता के बीच की प्रतिक्रिया के अनुभव से मिलती है. मसलन किसी टीवी या सिनेमा में किसी अंतरंग या रोमांटिक दृश्य या संदेश पर माता-पिता की प्रतिक्रिया को जब बच्चा देखता है फिर उस पर अपनी सोच बनाता है. यह भी बच्चे में सेक्स का पहला अनुभव का कारण बनता है. कई बार बच्चे घर में बड़ों के सेक्स कार्यकलापों को देख लेते हैं और उसे अपने बालमन के अनुरूप गढ़ लेते हैं. कई बार सेक्सी बाते सुनकर भी अनुभूति प्राप्त करते हैं. कई बार यह भी देखा जाता है कि स्कूल में अपने से बड़े उम्र के बच्चे की संगत में आकर भी उसे सेक्स की जानकारी मिलती है. ऐसी ही एक घटना मेरे परिचित ने अपने बारे में बताई कि जब वे लगभा १२ साल के रहे होंगेउस दौरान कोई अवकाश का दिन था वे और उनका दोस्त जो उम्र में उनसे थोड़ा बड़ा था ने बताया कि आज टॉकीज में लव वाली फिल्म लगी है. तब उन्होंने लव का आशय लौ समझा और फिल्म देखने का इरादा किया. जब वे वहां पहुंचे तब उन्हें कुछ और पता चला. इस तरह की अनेकों घटनाएं मसलन एक छोटे बच्चे का पड़ोस में देखकर आने के बाद माता-पिता से यह कहना कि आप दोनों से लेटते नहीं बनता उसके दोस्त के मम्मी पापा ऐसे लेटते हैं. आदि उसके बालमन में सेक्स का सबक प्रारंभ कर देते हैं. ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी बनती है कि अपने बच्चे पर सतत निगरानी रखे कि बच्चा क्या देख सुन और कर रहा है. या उसकी प्रतिक्रिया क्या है. और उसे उचित तरीके से समझाएं साथ ही स्वस्थ वातावरण उसके सामने प्रस्तुत करें.
वहीं इन सबसे से हटकर कुछ लोगों का मानना है कि बालक अपने बचपन में जो देखता और अनुभव करता है वह सेक्स की अनुभूति नहीं होती है. हां वह एक जिज्ञासा जरूर होती है लेकिन उसमें सेक्स की अनुभूति नहीं होती है. लेकिन यही बच्चा जब किशोर अवस्था में आता है और उस वक्त वह जो देखता है और समझता है वह उसकी सेक्स की पहली अनुभूति होती है.क्योंकि तब उसे स्त्री पुरूष जैसे शब्दों का मतलब समझ में आने लगता है साथ ही इस दौरान अपने शारीरिक परिवर्तन के दौर से भी गुजर रहा होता है. इस अवस्था में विपरीत लिंग को देखकर एक अलग भावना का संचार भी होने लगता है जो सेक्स अनुभूति की पहली सीढ़ी है.

Tuesday, November 14, 2006

क्या सेक्स का मतलब प्यार है

प्यार और सेक्स इतनी आसानी से एक दूसरे में बदल सकते हैं. जिस तरह से पर्यायवाची शब्द. क्या प्यार का मतलब सेक्स है? क्या सेक्स का मतलब प्यार है? क्या प्यार के दौरान सेक्स कुछ होता है?
मुझे तुमसे प्यार हो गया है. आओ प्यार करें.... कुछ इस तरह के जुमले प्यार जताने के लिये कहे जाते हैं. कुछ ज्यादा गहराई वाले - क्या तुम मुझे दिल से चाहते हो?यह मनमौजीपन या कहें कि पागलपन का दर्शन है जो आजकल चारों ओर बज रहा है. ये दोनों शब्द प्रायोगिकरूप से बदलते रहते हैं. तब ऐसे में सेक्स क्या है? यह किस तरीके से प्यार में फिट होता है.
हम सभी अभिलाषा और उत्तेजना के एक जाल से बने हुए हैं. उदाहरण के तौर पर खाने को ले. शरीर को स्वस्थ और स्फूर्ति भरा रखने के लिए खाने की जरूरत होती है. लेकिन दूसरी ओर खाने के ही इतने ही स्वाद और प्रकार हैं जो हमें खाने का आनंद दिलाते हैं. ठीक इसी तरह ज्ञान की अभिलाषा है. यह ज्ञान की अभिलाषा ही हमें ज्ञान और चीजों को बेहतर तरीके से समझने के लिये प्रेरित करती है और स्थिर रहने से रोकती है.
भगवान ने हमारे लिये इसीतरह प्यार और मित्रता की अभिलाषा बनाई है. इसी उद्देश्य से उसने हमारे लिये सेक्स संबंधी अभिलाषाएं बनाई हैं. जिसमें भावनात्मक और शारीरिक दोनों हैं. कुल मिला कर भोजन की आकांक्षा के साथ उसने उचित आचार व्यवहार के साथ सेक्स यात्रा भी निर्मित की है.भगवान ने इसी भावनात्मक और शारीरिक परिचय को पूरा करने के लिये शादी का एक खाका तैयार किया और शादी के बाद पति पत्नी के बीच प्यार के बहुत ही महत्वपूर्ण और गहरे प्रदर्शन के लिये सेक्स की रचना की. भगवान ने सेक्स की उसने ही सेक्स को जन्म दिया. यह उसी का प्लान था. जब उसने आदमी की रचना की तो उसने कहा बहुत अच्छा. तब आदमी की अभिलाषा और उसके लक्षण सभी ठीक थे. लेकिन आज के दौर में काफी समस्याएं खड़ी हो गई हैं. इसका कारण यह है कि जो भावनात्मक और शारीरिक प्रदर्शन शादीशुदा जिंदगी में होना चाहिये वह अब शादी से इतर हो रहा है. और अब परिणाम स्वयं सामने आ रहे है. वह भी टूटते हुए दिल के रूप में. आदमी की सोच दूषित होती जा रही है. इसके परिणाम विभिन्न बीमारियों और शारीरिक कमजोरियों के रूप में सामने आ रहे हैं. सेक्स में कुछ तो बहुमूल्यता है जो शादी के लिये अनमोल कोष है. इसलिये रचयिता के प्लान का पालन करना चाहिये . यदि शादी तक के लिये सेक्स छोड़ देते हैं तो आप पाएंगें कि वास्तविक प्यार क्या है, जो संदेह और अविश्वास से मुक्त होगा. भगवान ने सेक्स बनाया है जिसका उद्देश्य शादी के लिये है. इसलिये आग को आग वाले स्थान तक के लिये छोड़ दें. तभी प्यार और सेक्स एकाकार होंगें अन्यथा प्यार और सेक्स बेमानी और झूठे हैं.
दूसरी ओर इन सबसे हटकर यह कह सकते है कि प्यार और सेक्स दो अलग अलग चीजें हैं. प्यार एक आवेग भावना या अनुभव है. प्यार की कोई परिभाषा नहीं हो सकती क्योंकि प्यार का अर्थ कई अलग-अलग चीजों और अलग-अलग व्यक्तियों पर केन्द्रित है. जबकि सेक्स एक अलग मामला है जो कि जीवविज्ञान की एक घटना है. यद्यपि सेक्स के कई प्रकार हैं और अधिकतर सेक्सुअल कार्यों में निश्चित तौर पर चीजें कामन होती है. सेक्स कोई अर्थ बोध नहीं रखता है. अब सेक्स और प्यार के अन्तर को निम्न रूप में समझ सकते हैं-
प्यारः
- प्यार एक अनुभूति (भावनात्मक) है.
- प्यार की सभी लोगों के लिये यथार्थ परिभाषा नहीं है.
- प्यार औपन्यासिक कथाओं और/ या आकर्षण की अनुभूति है.
सेक्सः
- सेक्स एक घटना या कार्य (शारीरिक) है.
- सेक्स के कई प्रकार हैं पर सभी प्रकारों में कुछ चीजें समान होती है.
- सेक्स महिला-पुरुष, दो महिलाओं, दो पुरुषों या किसी अकेले के द्वारा स्वयं (हस्तमैथुन) किया जाता है.

Saturday, October 21, 2006

क्या सोचते हैं टीनएजर्स और युवा

नई सदी की शुरुआत के साथ काफी बदलाव आया है. प्रेम की भाषा, परिभाषा और सोच बदल गई है. शब्द के रूप बदल गए हैं. सेक्स शब्द आज बोलचाल का आम शब्द हो गया है. किसी की तारीफ करना हो तो यह आम शब्द बन गया है. कामुकता के भाव की अभिव्यक्ति के लिए इस शब्द का इस्तेमाल तो होता ही है साथ ही दूसरी ओर सेक्सी शब्द आज ढाई अक्षर प्रेम का नया रूप है जो हमेशा कामुकता की ओर इशारा नहीं करता बल्कि उस माहौल और उसमें समाई चीजों को एक खास रूप में पेश करता है. आज का पूरा माहौल सेक्सी सुविधाओं व कृतियों से भरा पड़ा है. कम्प्यूटर सेक्सी है, टीवी पर न्युजरीडर सेक्सी है, म्यूजिक सिस्टम सेक्सी है, पोशाकें तो सेक्सी हैं ही अब जूते चप्पल तक सेक्सी हो गये हैं. सेक्सी शब्द आज ऐसा साफ सुथरा किन्तु शरारत पूर्ण शब्द बन गया है जो मन के किसी कोने में पैदा हुई यौनेच्छा से जुड़ी गुदगुदी जगा देता है. बहरहाल सेक्स को लेकर सबकी सोच अलग है.
· सेक्स कोई झंझट का विषय नहीं है कि आपके अंतरंग में क्या छिपा है और क्या शारीरिक अंतर है- यह स्वीकार्यता है.
· सेक्स उसे फूल भेजना है यह कहने के लिये कि वह उसके लिये लकी है- यह मूल्यांकन है.
· सेक्स पहचाना जाता है कि वह एक अत्यंत सुकुमार कोमल रात्रि चुंबन होगा - यह पूर्वज्ञान है.
· सेक्स काम, बच्चे और किसी को समय देने की समस्या नहीं है - यह व्यवस्था( adjustment) है.
· सेक्स यह जताता है कि तुम एक दूसरे के लिये बने हो और हमेशा एक दूसरे के लिये बने रहोगे- यह एक बंधन है.
· सेक्स व्यक्ति को बताता है कि तुम छुट्टियों में हो और चाहते हो वह सो रही हो और उसे डिस्टर्ब न करो, जवाब में पता चलता है वह अक्सर जागती ही रही है- यह दयालुता है.
· सेक्स किसी निर्लज्ज जगह पर पकड़े जाने के डर के प्यार करना है - यह पागलपन है.
· सेक्स एक दूसरे की बांहों में पूरी रात पड़े रहना है. यह समीपता है.
· सेक्स किसी के बारे में पूरा दिन सोचना और उसके साथ रहना है- यह अभिलाषा है.
· सेक्स खुशी में जोर से चिल्लाना है जब आप चरम (climax) को पा चुके हों- यह हर्षोन्माद है.
· सेक्स आप को एक और मौका देता है कि आप किसी दूसरे शरीर को समझने के लिये दौड़ लगाएं- यह अनुसंधान है.
· सेक्स यह जानते हुए विदा कहने का समय है कि जब आप दोबारा मिलेंगे तो एक दूसरे के दिल दिमाग और खून में बसे होंगे- यह विश्वास है.
· सेक्स समय, स्थान और काम को लेकर निर्भीकता है- यह आनंद है.
· सेक्स हर वक्त लंबे समय तक उनकी बांहों में रहना है और दूरी इतनी हो कि तुम उसे मौत दे सको- यह निर्जनता है.
· सेक्स सही समय की प्रतीक्षा है- यह धैर्यता है.
· सेक्स बगैर असफल हुए दोनों के द्वारा सावधानी बरतना है- यह जिम्मेदारी है.
· सेक्स तुम्हारे प्रेमी का तुम्हारे चुंबन से धीरे से जागना है- यह विषय सुख है.
· सेक्स यह बताता है कि तुम पूरे विश्व का सामना कर सकते हो यदि तुम अपने पार्टनर के साथ हो- यह विश्वास है.
· सेक्स बताता है कि तुम्हारे प्रेमी या प्रेमिका की आंखों में तुम्हारे अलावा दूसरा कोई नहीं है- यह सच्चाई है.
· सेक्स तुम्हारे कमरे की वह दूसरी चाभी है जिसे तुम उसे देते हो जिसे प्यार करते हो- यह विश्वास है.
· सेक्स में यह कहने की जरूरत नहीं है कि चलो प्यार करें क्योंकि आपको मालूम होता है कि सामने वाला क्या चाहता है- यह समझ (understanding) है.
· सेक्स उसका साथ पाने के लिये पूरी रात जागना है जब वह कहीं दूर हो- यह घावों से भरा हुआ है.

Tuesday, October 17, 2006

सेक्स और उम्र

यदि कहा जाय तो सेक्स की वास्तविक उम्र वह होती है जब कोई पुरुष या महिला मेडिकल तौर पर बालिग हो जाते हैं. लेकिन आज के समय में सेक्स की उम्र का निर्धारण कठिन है. टीन एज या किशोरावस्था से ही लोग सेक्स क्रिया के प्रति उत्सुकता दिखाने लगते हैं. यही वह उम्र होती है जब शारीरिक परिवर्तन का दौर शुरू होता है और विपरीत लिंग की ओर आकर्षण बढ़ता है. इसके साथ ही सेक्स शब्द के प्रति जिज्ञासा का दौर शुरू होता है. सेक्स एक आश्चर्यजनक अनुभव है. लेकिन दूसरी ओर यह एक बारूदी सुरंग भी है. इसलिये इसमें प्रवेश करने से पहले इस पर पूरा सोच विचार और पूरी जानकारी होना जरूरी है. चिकित्सा विज्ञान के अनुसार लड़कियों को तब तक सेक्स नहीं करना चाहिए जब तक वे सेक्स के प्रति जागरुक न हों और शारीरिक रूप से सक्षम(पूर्णता) न हो. पूर्ण जागरुकता न होने से एक ओर जहां गर्भ धारण करने का खतरा है तो दूसरी ओर किशोरावस्था में सेक्स करने पर सरवाइकल कैंसर की भी संभावना रहती है.
सेक्स और उसकी उम्र आज के समय का महत्वपूर्ण मुद्दा है. आज मीडिया व आम चर्चा में यह सभी जगह गाहे बगाहे उठता रहता. आम निष्कर्ष और धारणा के आधार पर सेक्स की औसत आयु 60 वर्ष तक आंकी जाती है. लेकिन आज मेडिकल साइंस और दिनचर्या के आधार पर इसमें बढ़ोत्तरी हो सकती है. महिला और पुरुष चक्र के आधार पर दोंनों का सेक्सुअल पैटर्न अलग-अलग होता है. आदमी में पौरुष कठोरता(उत्तेजना) तब शुरू मानी जाती है जब वह गर्भस्थान में स्थिर रह सकता है. संतानोत्पत्ति की क्षमता (वीर्य बनना) की शुरुआत 13 साल की आयु से हो जाती है किन्तु लड़कों में औसतन 16 वर्ष के पहले प्रारंभ नहीं होती है. यह समझने योग्य है कि इस अवस्था में काफी परिवर्तन आते हैं. लड़के 18 वर्ष की उम्र के लगभग सेक्स क्रिया कलापो के लिए उंचाई पा लेते है. जब यह प्वांइट ऑन हो जाता है तो उत्तेजना और स्खलन की क्षमता का एक बूंद द्वारा पीछा किया जाता है और यह क्षमता 30 साल की आयु तक पूर्णता लिये होती है.
जहां वह मानसिक रूप से एक स्खलन के पश्चात एक और स्खलन के लायक योग्य हो जाता है. 40 साल की उम्र तकलोग मानसिक रूप से उत्तेजकता और क्रिया कलापों को लेकर शिथिल होने लगते हैं. यह क्रमिक झुकाव 50 साल की उम्र तक चलता रहता है और यहां आकर व्यापक अस्थिरता उत्पन्न होती है. इस उम्र पर पुरुष की सेक्स क्षमता उसकी अंतिम किशोरावस्था और शुरुआती यौवनावस्था की आधी रह जाती है. 40 के बाद सेक्स के प्रति लगाव या उत्साह घटने लगता है. उत्तेजना कम शक्तिशाली और कठिन हो जाती है और स्खलन भी कमजोर पड़ जाता है.
उम्र के अनुरूप सेक्स क्षमताऔर लगाव में कमी के कई कारण हैं. इनमें कई शारीरिक और इंद्रिय संबंधी हैं. इनमें हृदय और उसका परिभ्रमणतंत्र का कमजोर होते जाना, ग्रंथि और हार्मोनल सिस्टम तथा नाड़ी तंत्र की क्षमता आदि हैं.
लेकिन इनके विपरीत देखा गया है कि जिनकी पौरुष क्षमता या सेक्स क्षमता कमजोर होती है उनमें 90 फीसदी लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं न कि शारीरिक या इंद्रिय रूप से. इनमें से भी 60 फीसदी लोग तो उत्तेजना और स्खलन संबंधी परेशानियों के लिये सिर्फ मानसिक रूप से ही पीड़ित होते हैं न कि शारीरिक रूप से.
महिलाओं में सेक्स क्षमता(संतानोत्पत्ति क्षमता) पुरुषों से जल्दी आ जाती है. अक्सर यह समय 2 वर्ष पहले होता है. यौवन का आरंभ लड़कियों में बदलता है जो 14 या 15 साल की उम्र के पहले प्रारंभ नहीं होता है. महिलाओं का उम्र के अनुसार सेक्स क्षमता का गिराव पुरुषों से भिन्न होता है. महिलाओं में उम्र के हिसाब से जैसे-जैसे हार्मोन का बनना न्युन होता जाता है योनि की दीवार का भीतरी आवरण पतला और कठोर होता जाता है साथ ही योनि स्निग्धता में भी कमी आती जाती है. जो सहवास के दौरान अनकम्फर्ट(असंतोषजनक) होता है. किन्तु इस अवस्था में भी महिला अपनी किसी उम्र दराज महिला के बराबर ही यौन सुख का आनंद उठा सकती है. हालांकि इस यौन सुख तक पहुंचने में लगने वाला समय ज्यादा होता जाता है. यह परिवर्तन मेनोपाज(रजोनिवृत्ति) तक धीरे-धीरे होते हैं. जो लगभग 45 से 55 साल की अवस्था में होता है. इसके बाद काफी नाटकीय परिवर्तन होता है. इसके पश्चात महिलाओं में सेक्स की रुचि खत्म होने लगती है या यह कहा जा सकता है कि महिला सेक्स का सामान्यतः आनंद नहीं ले सकती है. लेकिन इधर कुछ सालों में कई महिलाओं का मानना है किइस समय भी उनका सेक्स के आनंद की अनुभूति और रुझान बढ़ा है.

Monday, October 16, 2006

सेक्स का अर्थ

सेक्स का कोई शाब्दिक अर्थ नहीं है, दूसरा हर कोई इसे करना चाहता है. सेक्स का आशय सिर्फ जननेद्रियों से पूर्णतः संबंधित नहीं है. सेक्स का आशय उस बोधगम्य महत्वपूर्ण उद्यम से है जिस पर ईमानदारी से मूल्य लगाया जाय तो यह बहुमूल्य अभ्यास हो सकता है. सेक्स को महसूस किया जा सकता है पर परिभाषित नहीं किया जा सकता सेक्स करना और सेक्स को समझना दो अलग-अलग कार्य हैं. यह ठीक उसी तरह है जिस तरह भोजन करना और पोषण या पाचन क्रिया को समझना है. सेक्स सिर्फ सहवास तक सीमित नहीं है और न ही इसे जननेद्रियों के क्रिया कलापों तक सीमित किया जा सकताहै. वास्तव में सेक्स चंचलता का विशाल दायरा है. इस तरह इसका कोई शब्दार्थ नहीं है बल्कि यह सिर्फ एक अनुभूति है जो अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरीके से मिलती है. वहीं इसका दूसरा अर्थ पऱकृति से उस रिश्ते से लगाया जा सकता है जिसकी अनुभूति से मन को एक संतुष्टि मिलती है चाहे वह जननेन्द्रियों से मिले या किसी अन्य वस्तु, सोच, नामकरण या क्रिया कलापों से. कुल मिलाकर यह एक शब्द की अनुभूति है. इसलिएअब चलिए सेक्स की एक नई यात्रा पर दूसरी ओर एक नए अर्थ में जिस कार्य के बाद शरीर को एक नए आनंद की अनुभूति होती है वह सेक्स है. जो दिमाग से चलकर जनन इन्द्रियों द्वारा आत्मानंद को प्राप्त करता है. इस दौरान शरीर के हर अंग अपना अलग अलग महत्व रखते हुए अपनी सहभागिता निभाते है. सेक्स शब्द के अर्थ में कई शब्दार्थ समाहित रहते हैं. जिनमे मित्रता, दृढ़ परिचय, घनिष्टता, आनंद, उत्पादकता, शारीरिक सम्पूर्णता और वह विश्वास की जिंदगी सही है. सेक्स का लाक्षणिक अर्थ है यथार्थता और यह धर्म तथा रीति के निबंधो के तहत चलती है. एक विद्वान का मत है कि सेक्स मूलतः शरीर में ही विद्यमान है. यह एक अरैखिक अनुभव है. सेक्स का विश्लेषण अनुभूति आदि तो किया जा सकता है किन्तु सेक्स करना और समझना दोनों अलग-अलग कार्य हैं. वहीं कुछ का मानना है कि एक ऐसी कल्पना जिसे हर कोई आनंद के लिए पाना चाहता है सेक्स कहलाती है. दूसरी ओर आधुनिक ख्याल के लोगों के अनुसार असीम आनंद की अनुभूति के लिए दो विपरीत या समान लिंग वालों द्वारा शरीर के कुछ विशेष अंगों द्वारा की जाने वाली क्रियाएं सेक्स कहलाती हैं. इन सबके विपरीत शब्दकोश में दिये गए शाब्दिक अर्थों पर जाएं तो उसका मतलब लिंग, स्त्री पुरुष भेद, काम क्रिया, यौन क्रिया, संभोग, सहवास आदि है.

Penis & Size

Measuring the penis
To get the most accurate measurements for an individual's penis size, it has been recommended that several measurements be taken at different times, preferably with different erections on different days. Then average these figures together. This is to account for what may be natural variability in size due to factors such as arousal level, time of day, room temperature, frequency of sexual activity, and unreliability of the measurement methods.

Length
The length can be measured with the subject standing and the penis held parallel to the floor. The penis is measured along the top, from the base to the tip. Results are inaccurate if the measurement is taken along the underside of the penis, or if the subject is seated or prone.

Circumference
Penis girth is the measurement of the circumference of the completely erect penis. It is variously quoted as an average of three measurements: just below the glans penis, in the middle of the shaft, and at the base.

Problems
A penis must be completely erect in order to obtain an accurate measurement. This may be difficult to achieve in a clinical setting. At least one Brazilian doctor resorted to injecting penises with drugs to induce erection, which gave more consistent results. Some clinicians measure the penis by stretching the flaccid penis as far as comfortably possible. Self-reported measurements tend to be unreliable because men often want to report a larger penis size.

Studies on penis size
While results vary across studies, the consensus is that the average human penis is approximately 12.9–15 cm (5.1–5.9 in) in length with a 95% confidence interval of (10.7 cm, 19.1 cm) (or, equivalently, 4.23 in, 7.53 in). The typical girth or circumference is approximately 12.3 cm (4.85 in) when fully erect. The average penis size is slightly larger than the median size (or, put another way, most penises are below average in size).

Size at birth
The average stretched penile length at birth is about 4 cm (1.6 in), and 90% of newborn boys will be between 2.4 and 5.5 cm (0.9 and 2.2 in). Limited growth of the penis occurs between birth and 5 years of age, but very little occurs between 5 years and the onset of puberty. The average size at the beginning of puberty is 6 cm (2.4 in) with adult size reached about 5 years later. W.A. Schonfeld published a penis growth curve in 1943.

Size with aging
Age is not believed to negatively correlate with penis size. “Individual research studies have ... suggested that penis size is smaller in studies focusing on older men, but Wylie and Eardley found no overall differences when they collated the results of various studies [over a 60 year period].”

Erect length
Several scientific studies have been performed on the erect length of the adult penis. Studies which have relied on self-measurement, including those from Internet surveys, consistently reported a higher average length than those which used medical or scientific methods to obtain measurements.
The following staff-measured studies are each composed of different subgroups of the human population (i.e. specific age range and/or race; selection of those with sexual medical concerns or self-selection) which could cause a sample bias.
A study published in the September 1996 Journal of Urology concluded that average erect length was 12.9 cm (5.08 in) (measured by staff). The purpose of the study was to “provide guidelines of penile length and circumference to assist in counseling patients considering penile augmentation.” Erection was pharmacologically induced in 80 physically normal American men (varying ethnicity, average age 54). It was concluded: “Neither patient age nor size of the flaccid penis accurately predicted erectile length.”
A study published in the December 2000 International Journal of Impotence Research found that average erect penis length in 50 Jewish Caucasian males was 13.6 cm (5.35 in) (measured by staff). Quote: "The aim of this prospective study was to identify clinical and engineering parameters of the flaccid penis for prediction of penile size during erection." Erection was pharmacologically induced in 50 Jewish Caucasian patients who had been evaluated for Erectile dysfunction (average age 47±14y). Patients with penis abnormalities or whose ED could be attributed to more than one psychological origin were omitted from the study.
A study conducted by LifeStyles Condoms found an average of 14.9 cm (5.9 in) with a standard deviation of 2.1 cm (0.8 in) (measured by staff). The purpose of this study was to ensure properly sized condoms were available. 401 college students volunteered to be measured during 2001 Spring Break in Cancún, Mexico, of which 300 gained an erection to be clinically measured (without pharmacological aid). The 300 effective measurements makes this study double the size of any prior study that uses medical staff to measure penis size (but the sample is more representative of male American college students visiting Cancun than it is of the entire male American population).

Erect circumference
The Cancún LifeStyle study found an average of 12.6 cm (5.0 in) with a standard deviation of 1.3 cm (0.5 in).
Similar results exist regarding studies of the circumference of the adult fully erect penis, with the measurement taken mid-shaft.[citation needed] As with length, studies that relied on self-measurement consistently reported a higher average than those with staff measuring.

Flaccid length
One study found the mean flaccid penis length to be 3.5 inches (8.9 cm) (measured by staff). Length of the flaccid penis does not necessarily correspond to length of the erect penis; some smaller flaccid penises can grow much larger, and some larger flaccid penises cannot grow much larger.
The penis and scrotum can contract involuntarily in reaction to cold temperatures or nervousness, referred to by the slang term "shrinkage", due to action by the cremaster muscle. The same issue affects cyclist and exercise bike users, with prolonged pressure on the perineum from the saddle, and the straining of the exercise causing the penis and scrotum to contract involuntarily which is sometimes referred to as "gym balls" or "saddle balls". An incorrect saddle may ultimately cause erectile dysfunction.

Penis size and female genital response
According to some sex researchers and therapists, several misconceptions have developed surrounding penile-vaginal intercourse. Many men exaggerate the importance of deep vaginal penetration in stimulating a woman to orgasm.
The most sensitive area of the female genitals includes the vulva, clitoris, and the section of vagina closest to the outside of a woman's body, which is roughly 10 centimeters (4 in) in length. Research has found that portions of the clitoris extend into the vulva and vagina. Given that the median penis size is above this length, the majority of penises are of sufficient length to fully satisfy their partners.
While many women find penile stimulation of the cervix to be uncomfortable or painful, others report it to be the key to orgasm. The cervix may be confused with the anterior or posterior fornix, the deepest point of the vagina, above and below the cervix, respectively. The cervix and fornix are close to each other, making it possible for there to be indirect and/or simultaneous stimulation between them.
The fornix is said to be another possible orgasm trigger area. Tests have shown that pressure on this area causes the vagina to lubricate very quickly. The area of sexual response in the anterior fornix has also been called the epicentre, T-Spot, AFE-Zone, AFE or A-Spot; while in the posterior fornix it has been called epicenter (as well) or cul-de-sac (since the cul-de-sac, also known as the rectouterine pouch, may be indirectly stimulated by pressure on the posterior fornix).
During arousal, the vagina lengthens rapidly to an average of about 4 in (8.5 cm), but can continue to lengthen in response to pressure. As the woman becomes fully aroused, the vagina tents (last ²⁄₃ expands in length and width) while the cervix retracts. The walls of the vagina are composed of soft elastic folds of mucous membrane skin which stretch or contract (with support from pelvic muscles) to the size of the penis. This means (with proper arousal) the vagina stretches or contracts to accommodate virtually any size penis, from small to large.

Penis enlargement surgery
Main article: Penis enlargement
Surgical techniques used for penis enlargement (enhancement phalloplasty) -- penis lengthening and penile widening (girth enhancement) -- have been in the urologic literature for many years.
There are two basic ways of enlarging the penis:
Penis lengthening surgery involves the release of the fundiform ligament and the suspensory ligament that attaches the 2 erectile bodies to the pubic bone. Once these ligaments have been cut, part of the penile shaft (usually held within the body) drops forward and extends out, enlarging the penis in 2-3 cm.
Penis widening with PMMA injection. This method involves injection of silicone, PMMA and other materials into the penis and scrotum, to achieve girth enlargement.