Monday, July 21, 2008

सेक्स के जादुई आनंद का बटन

कई लोगों ने यह जानना चाहा है कि संभोग के पूर्व क्या किया जाना बेहतर हो सकता है. प्रस्तुत है सेक्स के जादुई आनंद का बटन भगशिश्न(clit):
यह महिला के लिये सेक्स के जादुई आनंद का बटन है. भगशिश्न मूलतः पुरुष के शिश्न की ही तरह है लेकिन आकार में काफी छोटा है. यदि इसे सही तरीके से सहलाया जाता है तो यह महिला काफी ज्यादा आनंद व उत्तेजना प्रदान करता है. महिला के शरीर में भगशिश्न ही ऐसी इकलौती इन्द्रिय है जिसका एकमात्र कार्य सेक्स आनंद है। यह लगभग 1 सेमी. लंबी होती है तथा योनि द्वार के ऊपर पायी जाती है.
शिश्न की ही तरह, भगशिश्न की भी अग्र त्वचा(foreskin) और एक दंड(shaft) होता है. लेकिन भगशिश्न को सहलाने के कई तरीके होते हैं. जो कि हर महिलाओं में अलग-अलग होते हैं. इसके लिये आपको स्वयं तलाशना होगा कि कौन सा तरीका आपकी महिला पार्टनर के लिये सबसे बेहतर हो सकता है. सबसे सही और शीघ्रता वाला तरीका तो यही है कि उसे कहें कि वह स्वयं अपने भगशिश्न को सहला कर बताए, फिर आप उसके तरीके की नकल कर लें. कई महिलाएं तो भगशिश्न को सहला कर ही हस्तमैथुन की क्रिया को अंजाम देती हैं। इसी दौरान आपको देखना होगा कैसे वह परम आनंद की ओर जाती है। लेकिन कई महिलाएं इस तरीके से हस्तमैथुन नहीं करती तो कई महिलाएं आपके सामने इस क्रिया को अंजाम नहीं देना चाहती. इन परिस्थितियों में उसकी उत्तेजना के बारे में जानने के लिये आपको कई प्रयोग करने होंगे. इसके लिये आपको उसके भग शिश्न को विभिन्न तरीकों से सहलाना होगा.
यहां यह ध्यान रखे कि सीधे आप उसके भगशिश्न तक न पहुंचे. हमेशा लैंगिक उत्तेजना की शुरुआत उसके शरीर से खिलवाड़(foreplay) द्वारा करके उसे जमकर सताएं. इसके बाद जब उसके भगशिश्न के पास पहुंचे तो उसके चारों ओर के क्षेत्र की मालिश करें या मसले. यह क्रिया उसके भगशिश्न में पर्याप्त मात्रा में रक्त भर देगी(शिश्न की तरह). इसके पश्चात भगशिश्न सीधे तरीके से खिलवाड़ के लिये तैयार होगी.

अभ्यास 1: भगशिश्न के चारों ओर खिलवाड़
उसके भगशिश्न के चारों ओर अंगमर्दन(Massage) करें: मसलन जांघे, उदर(पेट), कूल्हे. अंगमर्दन की यह क्रिया आहिस्ता-आहिस्ता भगशिश्न के निकट करते जाएं. अंगमर्दन द्वारा भगशिश्न के चारों ओर एक घेरा बनाएं लेकिन भगशिश्न को छुएं नहीं. इस क्रिया को कुछ मिनटों तक दोहराते रहें. अब जब आप उसके भगशिश्न तक पहुंचे तो अपनी एक उंगली के सिरे का उपयोग करें. उंगली द्वारा भगशिश्न को काफी हल्के से वृत्ताकार घेरे में रगड़े, फिर ऊपर नीचे की दिशा अपनाएं फिर बाएं व दाएं की दिशा के अनुसार उंगली से सहलाएं. यह सब इसपर निर्भर करता है कि उंगली की किस हरकत को महिला ज्यादा तरजीह देती है. क्योंकि हर महिला व हर भगशिश्न अलग प्रवृत्ति की होती है. लेकिन सामान्य तौर पर पहली हरकत काफी हल्के स्पर्श या छुअन के रुप में होनी चाहिए.

अभ्यास 2: भगशिश्न से खिलवाड़
जब आप निश्चित हो जाएं कि वह तैयार हो गई है तो आप अपनी उंगली के अग्रभाग को उसके भगशिश्न पर ले जाएं. यह तब ज्यादा आसान होगा जब उसके पांव फैले हों. अब उसके भगशिश्न को काफी हल्के तरीके से सहलाना शुरू करें. सबसे पहले गोलाई में सहलाएं फिर अन्य दिशाओं में भी प्रयत्न करें. साथ ही उससे पूछे कि वह किस स्थिति को ज्यादा पसंद कर रही है.

इसके अलावा सबसे अच्छा तरीका है कि उसके भगशिश्न को उस तरह सहलाया जाए जिस तरीके से वह हस्तमैथुन करती है. इसके लिये उससे पूछे या उसे करके दिखाने को कहें. यदि वह कोई प्रस्ताव या सलाह देती है तो उसे स्वीकार करें. यहां यह जरूर ध्यान रखें जब भी आप उसके भगशिश्न के समीप जाएं अपने नाखून काट कर रखें या काफी छोटे रखें. भगशिश्न की कोमलता की वजह से लंबे और तीखे नाखून छिलने या कटने का कारण बन सकते हैं. इतना कुछ करने के बाद भी आप प्रतिपुष्टि (feedback) नहीं पा रहे हैं तो समझे कि आप निश्चित तौर पर उसके भगशिश्न को गलत तरीके से सहला रहे हैं(यह न भूले कि कभी कभी जो चीज किसी व्यक्ति के लिये सही होती है वही दूसरे के लिये गलत भी हो सकती है).
यहां यह भी जानने योग्य है कि आप यदि गलत कर रहें हैं तो भी वह आपसे नहीं कहेगी. इसलिये आपको ही अपने अंदाज से उससे पूछना पड़ेगा कि किस तरीके से सहलाने पर उसे आनंद की प्राप्ति ज्यादा होती है. यदि एक बार आपने सही तरीका पा लिये तो उसे आप बेहतरीन सेक्स आनंद का लाभ दे सकते हैं और उसकी उत्तेजना को शिखर तक पहुंचा सकते हैं.

Tuesday, June 03, 2008

सेक्स उन्मुख बॉडी लैंग्वेज

बातें वही होती है जो मुंह से बोली या सुनी जाती हैं लेकिन कुछ ऐसी भी बातें है जो देख कर समझी जाती हैं और वह है शरीर की भाषा(बॉडी लैंग्वेज). दरअसल शरीर की भाषा वह भाषा है जो कभी गलत नहीं होती क्योंकि शरीर की भाषा रूपी संदेश अंजाने ही स्वतः भेजे जाते हैं. लेकिन इसे समझना इतना आसान भी नहीं है. यहां यह भी जान ले कि एक ही समय में महिलाएं पुरुषों की तुलना में पांच गुना अधिक शरीर की भाषा व भाव संदेश भेजती हैं. सेक्स क्या में हम यह बताने जा रहे हैं कि किस तरीके से किसी महिला या पुरुष के हाव भाव के अनुरूप आप यह जान सकते हैं कि उसकी रुचि सेक्स में हैं
या फिर किसी और में. हालांकि यहां पर हम सेक्स अभिरुचि मात्र से संबंधित शारीरिक भाषा संदेशों के बारे में नहीं बताएंगे बल्कि उससे संबंधित सभी संदेशों को बताने का प्रयास करेंगे. हमने शारीरिक संकेतों के संकलन की कोशिश की है यदि आप के पास भी कुछ ऐसे ही शरीर की भाषा से संबंधित संकेतों की जानकारी है तो मुझे मेल करें (sharmarama2000@yahoo.com)
शरीर विज्ञान के जानकारों का कहना है कि यौन हितों से संबंधित मामलों में शरीर की भाषा के बहुत ही प्रभावी परिणाम हो सकते हैं. ज्यादातर शरीर भाषा विज्ञानियों का कहना है कि एक महिला आसानी से अपनी शारीरिक भाषा की सहायता से पुऱुषों को अपनी ओर उकसा या बहका सकती है. इसकी वजह है कि एक ही समय अवधि में महिला पुरुषों की तुलना में पांच गुना अधिक शारीरिक भाषा व भाव संदेशों को भेज सकती हैं. यहां काफी संख्या में महिलाओं द्वारा दिये जाने वाले शारीरिक भाषा के संकेत हैं जो पुरुषों की सेक्सुअल सहज वृत्ति को बढ़ा सकते हैं. शोध द्वारा पता चला है कि कई बार शरीर से निकले संकेत अनजाने में ही बाहर आ गये हैं जिन्हे जानकार ही समझ सकते हैं तो कई बार कुछ जानकार लोग जानबूझ कर कुछ उद्देश्य पूर्ण संकेत देते हैं. यहां अनजाने ही स्वतः रुप से बाहर निकले शारीरिक संदेशों पर चर्चा करेंगे क्योंकि वही हकीकत के काफी निकट होते हैं.

सामान्य तौर पर किसी महिला का बल पूर्वक अपने पैरों को लपेटना(पुरुष सामान्य तौर पर ऐसा नहीं करते क्योंकि उनके कूल्हे महिलाओं की अपेक्षा काफी संकीर्ण होते हैं) किसी पुरुष का ध्यान अपनी ओर आसानी से खींच सकता है. जिसका आशय यह निकल सकता है कि वह काफी रक्षात्मक मुद्रा में है तथा पुरुष से यौन संबंध के लिये रास्ते बंद का संकेत है. हालांकि उसकी कसी या तनी हुई पांवों की मांसपेशियां किसी पुरुष के लिये काफी अपीलिंग होती है लेकिन यह उस पुरुष के लिये काफी उलझन भरा चैलेंज होता है और बेहतर है उससे दूर रहा जाए.
अगले दिनों में अन्य बॉडी लैंग्वेज की जानकारी देते रहेंगे

Tuesday, May 20, 2008

मोटे लोगों के लिये सेक्स पोजीशन

आमतौर पर कहा और सुना जाता है कि मोटे लोग सेक्स का सही लुत्फ नहीं उठा पाते हैं लेकिन यह गलत है. यह जरूर है कि सामान्य युगल की तरह वे सेक्स के तौर तरीके नहीं अपना सकते हैं लेकिन सामान्य पोजीशनों में थोड़ा बहुत परिवर्तन करके वे सेक्स का पूरा आनंद उठा सकते हैं.
दरअसल सामाजिक तौर पर लोगों के द्वारा बनाए गए मिथक और ताने मोटे लोगों को सेक्स विरक्त या सेक्स के अयोग्य साबित करते हैं जबकि मोटे लोग भी सेक्स का आनंद एक आम आदमी की ही तरह ले सकते हैं. यहां प्रयास किया जा रहा है कि मोटे लोगों को सेक्स के चरम तक पहुंचाया जा सके... सेक्स पोजीशन पर जानकारी से पहले यह जान लेना जरूरी है कि किन वजहों से मोटे लोग सेक्स में असफल होते हैं-कहा जाता है कि मोटे लोग सेक्स में असफल होते हैं लेकिन मैं यहां बता देना चाहूंगा कि उनकी सेक्स में असफलता का कारण शारीरिक कम बल्कि मानसिक ज्यादा होता है. दरअसल मोटापे की शुरुआत से साथ ही सामाजिक तानों के द्वारा उनके दिमाग में यह भर दिया जाता है कि वे सेक्स करने में पूर्ण सफल नहीं होगे. यही बात उनके दिमाग में घर कर जाती है और वे दिमागी तौर पर सेक्स के लिये असफल होने लगते हैं. वहीं दूसरी ओर यह धारणा भी बन चुकी है कि मोटे लोग सेक्स उत्तेजना नहीं पाते यह भी उन्हे मानसिक तौर पर सेक्स के प्रति कमजोर करती है. जबकि हकीकत इसके उल्टी है. देखा यह गया है कि मोटे लोग ज्यादा सेक्स उत्तेजना को पाते हैं. तथा सेक्स का ज्यादा आनंद ले सकते हैं बजाय सामान्य युगल के.
अब आते हैं मोटे लोगों की सेक्स पोजीशन पर तो यहां यह समझना भी जरूरी है कि मोटापा कैसा है. दरअसल मोटापा कई प्रकार का होता है. कुछ लोगों की जांघे मोटी होती हैं तो कुछ के कूल्हे और कुछ पेट से ज्यादा मोटे होते हैं. इस आधार पर सुविधा अनुरूप अलग-अलग मोटाई के अनुसार सेक्स पोजीशन का चयन किया जाता है. साथ ही यह भी देखा जाता है पार्टनर में कौन मोटा है. महिला मोटी है या पुरुष या फिर दोनो मोटे हैं.
यहां हम शुरू करते हैं मिशनरी पोजीशन(देखें जब पुरुष उपर हो कि चौथी पोजीशन) से. यह सामान्य तौर पर हर वर्ग के लिये शुरूआती पोजीशन मानी गई है. और मोटे लोगों के लिये भी यह काफी बेहतरीन पोजीशन बन सकती है बशर्ते इसे सही तरीके से किया जाये. अपनी शारीरिक संरचना के अनुरूप थोड़े परिवर्तन कर इसे काफी आनंददायी बनाया जा सकता है. जैसे कुछ मोटी महिलाओं का पेट काफी बड़ा या झूलता हुआ होता है इस स्थिति में वे मिशनरी पोजीशन में काफी परेशानी महसूस करती हैं. इस परिस्थिति में आप अपने कूल्हों के नीचे तकिये रखें (आवश्यकता अनुरूप) यह आपको इतना उपर उठा देगा कि आपका पार्टनर आपके पैरों(जांघों) के बीच घुटनों के बल बैठ सकता है. अब यदि आप "सही" उंचाई (यह इस पर निर्भर करते हुए भिन्न हो सकती है कि किस कोण पर आप दोनों सहज महसूस करते हैं) पर हैं तो वह अपने लिंग को आसानी व सुविधाजनक तरीके से आपकी योनि में प्रवेश करा सकता है, इस दौरान वह आपके कूल्हों को अपने हाथों से सहारा दे सकता है या फिर उसके हाथ जहां से आप के घुटने मुड़ रहे हैं, वहां रखकर टांगों के फैलान को नियंत्रित कर सकता है. यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि इस पोजीशन में महिला का शरीर नीचे झूलने की वजह से उसका पेट खिंच कर पीछे चला जाता है और योनि से दूर हो जाता है जो प्रवेश की कई परेशानियों को कम कर देता है. इस पोजीशन को युगल चाहे तो अपनी सुविधा के अनुरूप परिवर्तित करके अपने लिये ज्यादा आनंददायी और आरामदायक बना सकते हैं.
लेकिन यह पोजीशन उन महिलाओं के लिये उपयुक्त नहीं साबित होती है जिनका पेट बड़ा होने के साथ-साथ जांघें भी अपेक्षाकृत ज्यादा भारी और मोटी होती है. इस अवस्था में जांघों के बीच गैप कम मिलने से पुरुष को प्रवेश के दौरान या फिर घर्षण के समय परेशानी हो सकती है जिससे काम क्रीड़ा उतनी आनंददायी नहीं रह जाएगी. वहीं दूसरी ओर इस पोजीशन में जिस पुरुष को प्रवेश के लिये पर्याप्त समीपता नहीं मिल पाती वह इस पोजीशन का उपयोग भगशिश्न (clit) उत्तेजना के लिये कर सकता है. इसके लिये वह अपने लिंग की सहायता से महिला के भगशिश्न को रगड़ कर महिला को उत्तेजना के चरम तक पहुंचा सकता है.
इस पोजीशन में थोड़ा परिवर्तन करके ज्यादा मोटी और भारी जांघों वाली महिलाओं के उपयुक्त बनाया जा सकता है. इसमें मिशनरी पोजीशन में परिवर्तन की शुरुआत पुरुष की महिला के जांघो के बीच, और प्रवेश से होती है. इसके पश्चात महिला अपने पांवों को सीधी या समतल स्थिति में ले आती है. इसके पश्चात पुरुष अपने एक पांव को उठाकर महिला के एक पांव के उपर कर लेता है. इस स्थिति में वह उसकी कमर पर झूल सा जाता है. अब महिला अपने दोनों पांवों को एक दूसरे की ओर ले आती है. तब पुरुष अपने दूसरे पांव को भी उपर उठा कर पूरी तरह से महिला के उपर आ जाता है. इस स्थिति में महिला का टांगे पुरुष के लिंग के चारों ओर आ जाती है और पुरुष काम क्रीड़ा का आनंद ले व दे सकता है. हालांकि यह पोजीशन शुरुआती दौर में थोड़ी कठिन जरूर है लेकिन अभ्यास के बाद यह काफी आनंददायी साबित होती है. लेकिन इस पोजीशन में लिंग को बाहर चरम अवस्था तक बाहर नहीं निकालना है.
ठीक इसी तरह शुरुआती पोजीशन को थोड़ा उल्टा कर देने से यह मोटी और भारी टांगों वाली महिलाओं तथा मोटे पेट वाले पुरुषों को गहरे प्रवेश का पूर्ण आनंद दे सकता है. इसके लिये पुरुष को महिला की तरह अपने कूल्हों के नीचें पर्याप्त उंचाई तक तकिये रख कर लेटना होगा. फिर महिला पुरुष के लिंग के उपर अपनी टांगे पुरुष के दोनो ओर करके खड़ी हो जाए. इस दौरान महिला अपनी टांगों को पर्याप्त दूरी तक फैला ले. फिर महिला घुटनों से अपनी टांगे मोड़ते हुए योनि को लिंग के उपर लाकर प्रवेश क्रिया को पूरा करे. इस अवस्था में महिला की टांगे पूरी तरह से 180 अंश के कोण पर होंगी और बीच में योनि पूरी तरह खुली होने से लिंग पर्याप्त गहराई तक जा सकेगा. इस पोजीशन में मोटे पेट वाले पुरुषों का पेट भी पीछे की ओर खिसक जाने से उसे भी पर्याप्त गहराई में प्रवेश की जगह मिल सकेगी.

अब हम बताते है दूसरी पोजीशन के बारे में इसमे महिला अपनी किसी भी करवट के बल लेट जाए. इस अवस्था में वह अपना नीचे वाला पांव सीधा फैला ले तथा अपना उपर वाला पांव उठाते हुए अपने स्तनों की ओर ले जाए. अब पुरुष महिला के नीचे वाले पांवों के समानान्तर अपने पांव फैलाते पीछे की ओर से लेट जाए. फिर उसके भग क्षेत्र से खुद को सटाते हुए प्रवेश क्रिया पूर्ण करे. इस पोजीशन में महिला का भग क्षेत्र पूरी तरीके से खुल कर सामने आ जाने से गहरा प्रवेश आसान हो जाता है.

इसी तरह ज्यादा मोटे और झूले पेट वाली महिलाओं के लिये श्वान(doggy) पोजीशन काफी उपयुक्त रहती है. इस पोजीशन में प्रवेश के दौरान महिला का पेट आड़े नहीं आता है. साथ ही इस पोजीशन में महिला को जी-स्पॉट सेक्स का भी आनंद मिलता है.

यदि दोनों पार्टनरों के पेट काफी बड़े है इसके लिये सबसे बेहतर पोजीशन है कि पुरुष अपने कूल्हों के नीचे तकिया लगाकर लेट जाए और अपनी टांगे सीधे फैलाते हुए खोल ले. इसके पश्चात महिला पुरुष के पांवों की ओर मुंह करके अपनी टांगों को कुछ दूरी पर रखते हुए घुटनों से जाघों को मोड़ते हुए योनि को लिंग में प्रवेश कराएं. इससे दोनों के पेट आपस में नहीं टकराने से प्रवेश गहरा व आरामदायक होता है.

जिस महिला के कूल्हे काफी बड़े होते है वह श्वान पोजीशन में थोड़ा परिवर्तन करके सेक्स का पूरा आनंद उठा सकती है. इसमें महिला घुटनों के बल लेट जाती है इस दौरान वह अपने स्तनों को सतह से सटा देती है. इस अवस्था में पीछे की ओर से योनि का ज्यादातर हिस्सा खुल जाता है. फिर भी कूल्हों की साइज बड़ी होने पर वह अपने हाथों की सहायता से कूल्हों को पकड़ कर खींचते हुए योनि को खोल लेती है. अब पुरुष इसमें प्रवेश के लिये तैयार है. यदि पुरुष का भी पेट बढ़ा तथा झूल रहा है तो वह अपने पेट को कूल्हों के उपर टिकाते हुए योनि में प्रवेश की क्रिया पूरी करता है.

शेष अगले दिनों में...

Sunday, March 23, 2008

गर्भधारण के लिये बेहतर सेक्स पोजीशन

सामान्य तौर पर गर्भ धारण के लिये शुक्राणु का बेहतर होना माना जाता है. लेकिन अब सेक्स पोजीशन भी चिकित्सकीय नजरिये से गर्भधारण में महती रोल अदा करने लगी है. हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है लेकिन कई बार देखने में आया है कि कुछ सेक्स पोजीशन गर्भधारण में काफी सहयोगी भूमिका निभाती हैं.



क्या कुछ सेक्स पोजीशन गर्भधारण के लिये अन्य से बेहतर होती हैं?
हालांकि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोई विशेष सेक्स पोजीशन गर्भधारण के लिये किसी अन्य पोजीशन से ज्यादा बेहतर है. लेकिन चिकित्साजगत के कुछ लोगों का मानना है कि जिस सेक्स पोजीशन से शुक्राणु को गर्भाशय में आसानी से प्रवेश व कम दूरी तय करनी पड़े उसमें गर्भधारण की संभावना ज्यादा होती है. इस आधार पर मिसनरी पोजीशन (जब पुरुष उपर हो) सबसे बेहतर पोजीशन मानी जाती है. लेकिन इसके साथ सही समय का चुनाव भी निर्णायक भूमिका निभाता है. अण्डोत्सर्ग के दौरान किया गया सेक्स गर्भधारण के लिये सबसे लाभदायक है. चूंकि पुरुष के शुक्राणु 2 से 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं लेकिन महिला का अण्डाणु 12 से 24 घंटे ही जीवित रह सकता है. इसलिये अण्डोत्सर्ग के दौरान किया सेक्स गर्भधारण की ज्यादा गारंटी देता है.

क्या रति-निष्पत्ति (orgasm) गर्भधारण के अवसर बढ़ाने में मददगार होती है?
कुछ लोगों का मानना है कि जो महिला अपने पुरुष साथी के स्खलन के बाद चरमोत्कर्ष को पाती है उसके गर्भधारण की संभावना ज्यादा होती है लेकिन इस विचार की सत्यता के भी कोई प्रमाण या वैज्ञानिक तथ्य नहीं है. यहां हम यह बता देना चाहेंगे कि संभोग के दौरान किसी महिला का चरमोत्कर्ष किसी भी गर्भधारण के लिये महत्वपूर्ण नहीं है. लेकिन यह गर्भाशय के संकुचन में मददगार बनकर शुक्राणु को फेलोपियन ट्यूब में भेजने में उत्प्रेरक का कार्य करता हैं.

संभोग के बाद लेटना जरूरी होता है?
गर्भधारण की बेहतर परिस्थितियों के चिकित्सकों के मत के अनुसार संभोग के पश्चात महिला को कम से कम 15 मिनट लेटे रहना चाहिये. हालांकि इस बात के कोई बैज्ञानिक सबूत नहीं हैं. चिकित्सकों के अनुसार संभोग के पश्चात 15 मिनट या उससे ज्यादा समय तक लेटे रहने से योनि के अंदर ज्यादा मात्रा में वीर्य रुकता है और इस बजह से ज्यादा संख्या मे शुक्राणु निषेचन के लिये तैयार हो पाते हैं. अन्यथा यदि संभाग के बाद महिला सीधे उठ या खड़ी हो जाती है तो वीर्य उसकी योनि से बाहर आ जाता है साथ ही कम संख्या में शुक्राणु योनि में बच पाते है. इसके अलावा खड़े होने पर शुक्राणु को गुरुत्व के विपरीत तैर कर ऊपर गर्भाशय में प्रवेश करने के लिये संघर्ष करना पड़ता है.

Saturday, March 22, 2008

योनि स्राव और उसके संकेत

योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होना आज मध्य उम्र की महिलाओं की एक सामान्य समस्या हो गई है। सामान्य भाषा में इसे सफेद पानी जाना कहते हैं. भारतीय महिलाओं में यह आम समस्या प्रायः बिना चिकित्सा के ही रह जाती है। सबसे बुरी बात यह है कि इसे महिलाएँ अत्यंत सामान्य रूप से लेकर ध्यान नहीं देती, छुपा लेती हैं श्वेत प्रदर में योनि की दीवारों से या गर्भाशय ग्रीवा से श्लेष्मा का स्राव होता है, जिसकी मात्रा, स्थिति और समयावधि अलग-अलग स्त्रियों में अलग-अलग होती है। यदि स्राव ज्यादा मात्रा में, पीला, हरा, नीला हो, खुजली पैदा करने वाला हो तो स्थिति असामान्य मानी जाएगी। इससे शरीर कमजोर होता है और कमजोरी से श्वेत प्रदर बढ़ता है। इसके प्रभाव से हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन रहता है। इस रोग में स्त्री के योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा, गाढ़ा, बदबूदार स्राव होता है, इसे वेजाइनल डिस्चार्ज कहते हैं। इस रोग के कारणों की जांच स्त्री रोग विशेषज्ञ, लेडी डॉक्टर से करा लेना चाहिए, ताकि उस कारण को दूर किया जा सके।

योनिक स्राव क्या होता है और कब उसे असामान्य कहा जाता है?
ग्रीवा से उत्पन्न श्लेष्मा (म्युकस) का बहाव योनिक स्राव कहलाता है। अगर स्राव का रंग, गन्ध या गाढ़ापन असामान्य हो अथवा मात्रा बहुत अधिक जान पड़े तो हो सकता है कि रोग हो। योनिक स्राव (Vaginal discharge) सामान्य प्रक्रिया है जो कि मासिक चक्र के अनुरूप परिवर्तित होती रहती है. दरअसल यह स्राव योनि को स्वच्छ तथा स्निग्ध रखने की प्राकृतिक प्रक्रिया है वहीं अण्डोत्सर्ग के दौरान यह स्राव इसलिये बढ़ जाता है ताकि अण्डाणु आसानी से तैर सके. अण्डोत्सर्ग के पहले काफी मात्रा में श्लेष्मा (mucous) बनता है. यह सफेद रंग का चिपचिपा पदार्थ होता है. लेकिन कई परिस्थितियों में जब इसका रंग बदल जाता है तथा इससे बुरी गंध आने लगती है तो यह रोग के लक्षण का रूप ले लेता है. यहां प्रस्तुत है योनिक स्राव की विस्तृत जानकारी-
सफेद योनिक स्रावः मासिक चक्र के पहले और बाद में पतला और सफेद योनिक स्राव सामान्य है. सामान्यतः सफेद योनिक स्राव के साथ खुजलाहट या चुनमुनाहट नहीं होती है. यदि इसके साथ खुजली हो रही है तो यह खमीर संक्रमण (yeast infection) को प्रदर्शित करता है.
साफ और फैला (Clear and stretchy) हुआः यह उर्वर (fertile) श्लेष्मा है. इसका आशय है कि आप अण्डोत्सर्ग के चक्र में हैं.
साफ और पानी जैसाः यह स्राव महिलाओं में सामान्य तौर पर पूरे चक्र के दौरान अलग-अलग समय पर होता रहता है. यह भारी तब हो जाता है जब व्यायाम या मेहनत का काम किया जाता है.
पीला या हराः यह स्राव सामान्य नहीं माना जाता है तथा बीमारी का लक्षण है. यह यह दर्शता है कि योनि में या कहीं तीव्र संक्रमण है. विशेषकर जब यह पनीर की तरह और गंदी बदबू से युक्त हो तो तुरंत चिकित्सक के पास जाना चाहिये.
भूराः यह स्राव अक्सर माहवारी के बाद देख ने को मिलता है. दरअसल यह "सफाई" की स्वाभाविक प्रक्रिया है. पुराने रक्त का रंग भूरा सा हो जाता है सामान्य प्रक्रिया के तहत श्लेष्मा के साथ बाहर आता है.
रक्तिम धब्बे/भूरा स्राव: यह स्राव अण्डोत्सर्ग/मध्य मासिक के दौरान हो सकता है. कई बार बार शुरूआती गर्भावस्था के दौरान भी यह स्राव देखने को मिलता है. इस आधार पर कई बार इसे गर्भधारण का संकेत भी माना जाता है.

किन परिस्थितियों के कारण सामान्य योनिक स्राव में वृद्धि होती है?
सामान्य योनिक स्राव की मात्रा में निम्नलिखित स्थितियों में वृद्ध हो सकती है- योनपरक उत्तेजना, भावात्मक दबाव और अण्डोत्सर्ग (माहवारी के मध्य में जब अण्डकोष से अण्डे का सर्जन और विसर्जन होता है)

असामान्य योनिक स्राव के क्या कारण होते हैं?
असामान्य योनिक स्राव के ये कारण हो सकते हैं- (1) योन सम्बन्धों से होने वाला संक्रमण (2) जिनके शरीर की रोधक्षमता कमजोर होती है या जिन्हें मधुमेह का रोग होता है उनकी योनि में सामान्यतः फंगल यीस्ट नामक संक्रामक रोग हो सकता है।

असामान्य योनिक स्राव से कैसे बचा जा सकता है?
योनिक स्राव से बचने के लिए - (1) जननेन्द्रिय क्षेत्र को साफ और शुष्क रखना जरूरी है। (2) योनि को बहुत भिगोना नहीं चाहिए (जननेन्द्रिय पर पानी मारना) बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि माहवारी या सम्भोग के बाद योनि को भरपूर भिगोने से वे साफ महसूस करेंगी वस्तुतः इससे योनिक स्राव और भी बिगड़ जाता है क्योंकि उससे योनि पर छाये स्वस्थ बैक्टीरिया मर जाते हैं जो कि वस्तुतः उसे संक्रामक रोगों से बचाते हैं (3) दबाव से बचें। (4) योन सम्बन्धों से लगने वाले रोगों से बचने और उन्हें फैलने से रोकने के लिए कंडोम का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। (5) मधुमेह का रोग हो तो रक्त की शर्करा को नियंत्रण में रखाना चाहिए।

असामान्य योनिक स्राव के लिए क्या डाक्टर से सम्पर्क करना चाहिए?
हां, शीघ्र ही डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। वे आपके लक्षणों की जानकारी लेंगे, जननेन्द्रिय का परीक्षण करेंगे और तदनुसार उपचार बतायेंगे।