Tuesday, March 18, 2008

यौन व जनन स्वास्थ्य संबंधी समाधान

शासकीय चिकित्सालय के गुप्त रोग परामर्श विभाग में आए सवालों के चिकित्सकीय नजरिये से जवाब. यह हमें भेजा है विभाग के एक शासकीय चिकित्सक ने.

1 यौवनारम्भ क्या होता है?
यौवनारम्भ वह समय है जबकि शरीरपरक एवं यौनपरक लक्षण विकसमत हो जाते हैं। हॉरमोन मे बदलाव के कारण ऐसा होता है। ये बदलाव आप को प्रजनन के योग्य बनाते हैं।

2. यौवनासम्भ का समय कौन सा है?
हर किसी में यह अलग समय पर शुरू होता है और अलग अवधि तक रहता है। यह जल्दी से जल्दी 9 वर्ष और अधिक से अधिक 13-14 वर्ष की आयु तक प्रारम्भ हो जाता है। यौवन विकास की यह कड़ी सामान्यतः 2 से 5 वर्ष तक की होती है। कुछ किशोरियों में दूसरी हम उमर लड़कियों में यौवन के शुरू होने से पहले यौवन विकास पूरा भी हो जाता है।

3. लड़कों में यौवनारम्भ के क्या लक्षण है?
यौवनारम्भ के समय सामान्यतः लड़के अपने में पहले की अपेक्षा बढ़ने की तीव्रगति को महसूस करते हैं, विशेषकर लम्बाई में। कन्धों की चौड़ाई भी बढ़ जाती है। 'टैस्टोस्ट्रोन' के प्रभाव से उनके शरीस में नई मांसलता और इकहरेपन की आकृति बन जाती है। उनके लिंग में वृद्धि होती है और अण्डकोष की त्वचा लाल-लाल हो जाती है एवं मुड़ जाती है। आवाज गहरी हो जाती है, हालांकि यह प्रक्रिया बहुत धीरे-धीरे होती है फिर भी कोई आवाज फटने जैसा अनुभव कर सकता है। यह स्वाभाविक और प्राकृतिक है, इसमें चिन्ता की कोई बात नहीं होती। लिंग के आसपास बाल, दाड़ी और भुजाओं के नीचे बाल दिखने लगते हैं और बढ़ने लगते हैं। रात्रिकालीन निष्कासन (स्वप्नदोष या 'भीगे सपने') सामान्य बात है। त्वचा तैल प्रधान हो जाती है जिससे मुहासे हो जाते हैं।

4. लड़कियों में यौवनारम्भ के क्या लक्षण है?
शरीर की लम्बाई और नितम्बों का आकार बढ़ जाता है। जननेन्द्रिय के आसपास, बाहों के नीचे और स्तनों के आसपास बाल दिखने लगते हैं। शुरू में बाल नरम होते हैं पर बढ़ते- बढ़ते कड़े हो जाते हैं। लड़की का रजोधर्म या माहवारी शुरू हो जाती है जो कि योनि में होने वाला मासिक रक्तस्राव होता है, यह पांच दिन तक चलता है, जनन तंत्रपर हॉरमोन के प्रभाव से ऐसा होता है। त्वचा तैलीय हो जाती है जिससे मुंहासे निकल आते हैं।

5. यौवनारम्भ के दौरान स्तनों में क्या बदलाव आता है?
स्तनों का विकास होता है और इस्ट्रोजन नामक स्त्री हॉरमोन के प्रभाव से बढ़ी हुई चर्बी के वहां एकत्रित हो जाने से स्तन बड़े हो जाते हैं।

6. यौवनारम्भ के परिणाम स्वरूप औरत के प्रजनन अंगों में क्या बदलाव आता है?
जैसे ही लड़की के शरीर में यौवनारम्भ की प्रक्रिया शुरू होती है, ऐसे विशिष्ट हॉरमोन निकलते हैं जो कि शरीर के अन्दर के जनन अंगों में बदलाव ले आते हैं। योनि पहले की अपेक्षा गहरी हो जाती है और कभी कभी लड़कियों को अपनी जांघिया (पैन्टी) पर कुछ गीला- गीला महसूस हो सकता है जिसे कि यौनिक स्राव कहा जाता है। स्राव का रंग या तो बिना की जरूरत नहीं। गर्भाषय लम्बा हो जाता है और गर्भाषय का अस्तर घना हो जाता है। अण्डकोष बढ़ जाते हैं और उसमें अण्डे के अणु उगने शुरू हो जाते हैं और हर महीने होने वाली 'अण्डोत्सर्ग' की विशेष घटना की तैयारी में विकसित होने लगते हैं।

7. अण्डकोत्सर्ग क्या है?
एक अण्डकोष से निकलने वाले अण्डे के अणु को अण्डोत्सर्ग कहते हैं। औरत के माहवारी चक्र के मध्य के आसपास महीने में लगभग एक बार यह घटना घटती है। निकलने के बाद, अण्डा अण्डवाही नली में जाता है और वहां से फिर गर्भाषय तक पहुंचने की चार-पांच दिन तक की यात्रा शुरू करता है। अण्डवाही नली लगभग पांच इंच लम्बी है और बहुत ही तंग है इसलिए यह यात्रा बहुत धीमी होती है। अण्ड का अणु प्रतिदिन लगभग एक इंच आगे बढ़ता है।

8. उर्वरण क्या है?
यौन सम्भोग के परिणामस्वरूप जब पिता के वीर्य का अणु मां के अण्ड अणु से जा मिलता है तो उसे उर्वरण कहते हैं। जब वह अण्ड अणु अण्डवाही नली में होता है तभी यह उर्वरण घटित होता है। शिशु के सृजन के लिए अण्डे और वीर्य का मिलना और जुड़ना जरूरी है। जब ऐसा होता है, तब और गर्भवती हो जाती है।

9. रजोधर्म/माहवारी क्या है?
10 से 15 साल की आयु की लड़की के अण्डकोष हर महीने एक विकसित अण्डा उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाही नली (फालैपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अण्डकोष को गर्भाषय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाषय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस अण्डे का पुरूष के वीर्य से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है।

10. माहवारी चक्र की सामान्य अवधि क्या है?
माहवारी चक्र महीने में एक बार होता है, सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार।

11. मासिक धर्म/माहवारी की सामान्य कालावधि क्या है?
हालांकि अधिकतर मासिक धर्म का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।

12. माहवारी मे सफाई कैसै बनाए रखें?
एक बार माहवारी शुरू हो जाने पर, आपको सैनेटरी नैपकीन या रक्त स्राव को सोखने के लिए किसी पैड का उपयोग करना होगा। रूई की परतों से पैड बनाए जाते हैं कुछ में दोनों ओर अलग से (Wings) तने लगे रहते हैं जो कि आपके जांघिये के किनारों पर मुड़कर पैड को उसकी जगह पर बनाए रखते हैं और स्राव को बह जाने से रोकते हैं।

13. सैनेटरी पैड किस प्रकार के होते हैं?
भारी हल्की माहवारी के लिए अनेक अलग-अलग मोटाई के पैड होते हैं, रात और दिन के लिए भी अलग- अलग होते हैं। कुछ में दुर्गन्ध नाषक या निर्गन्धीकरण के लिए पदार्थ डाले जाते हैं। सभी में नीचे एक चिपकाने वाली पट्टी लगी रहती है जिससे वह आपके जांघिए से चिपका रहता है।

14. पैड का उपयोग कैसे करना चाहिए?
पैड का उपयोग बड़ा सरल है, गोंद को ढकने वाली पट्टी को उतारें, पैड को अपने जांघिए में दोनों जंघाओँ के बीच दबाएं (यदि पैड में विंग्स लगे हैं तो उन्हें पैड पर जंघाओं के नीचे चिपका दें)

15. पैड को कितनी जल्दी बदलना चाहिए?
श्रेष्ठ तो यही है कि हर तीन या चार घंटे में पैड बदल लें, भले ही रक्त स्राव अधिक न भी हो, क्योंकि नियमित बदलाव से कीटाणु नहीं पनपते और दुर्गन्ध नही बनती। स्वाभाविक है, कि यदि स्राव भारी है, तो आप को और जल्दी बदलना पड़ेगा, नहीं तो वे जल्दी ही बिखर जाएगा।

16. पैड को कैसे फेंकना चाहिए?
पैड को निकालने के बाद, उसे एक पॉलिथिन में कसकर लपेट दें और फिर उसे कूड़े के डिब्बे में डालें। उसे अपने टॉयलेट मे मत डालें - वे बड़े होते है, सीवर की नली को बन्द कर सकते हैं।

17. मुंहासे से क्या होता है?
मुंहासे - त्वचा की एक स्थिति है जो सफेद, काले और जलने वाले लाल दाग के रूप मे दिखते हैं। जब त्वचा पर के ये छोटे - छोटे छिद्र बन्द हो जाते हैं तब मुंहासे होते हैं। सामान्यतः हमारी तैलीय ग्रन्थियां त्वचा में चिकनापन बनाए रखती है और त्वचा के पुराने अणुओं को निकालने में मदद देती है। किशोरावस्था में वे ग्रन्थियां बहुत अधिक तेल पैदा करती हैं जिससे कि छिद्र बन्द हो जाते हैं, कीटाणु कचरा और गन्दगी जमा हो जाती है जिससे काले मस्से और मुंहासे पैदा होते हैं।

18. मुहांसों के प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है?
मुंहासों के प्रभाव को कम करने के लिए निम्नलिखित स्व- उपचार की प्रक्रिया को अपनाये- (1) हल्के, शुष्कताविहीन साबुन से त्वचा को कोमलता से धोयें (2) सारी गन्दगी अथवा मेकअप को धो दें, ताजे पानी से दिन में एक दो बार धोयें, जिसमें व्यायाम के बाद का धोना भी शामिल है। जो भी हो, त्वाचा को बार-बार धोने या ज्यादा धोने से परहेज करें। (3) बालों को रोज शैम्पू करें, खासतौर पर अगर वे तेलीय हों। कंघी करें या चेहरे से बालों को हटाने के लिए उन्हें पीछे खीचें। बालों को कसने वाले साधनों से परहेज करें। (4) मुंहासों को दबाने, फोड़ने या रगड़ने से बचने का प्रयास करें। (5) हाथ या अंगुलियों से चेहरो को छूने से परहेज करें। (6) स्नेहयुक्त प्रसाधनों या क्रीमों का परहेज करें। (7) अब भी अगर मुंहासे तंग करें, डाक्टर आपको और अधिक प्रभावशाली दवा दे सकता है या अन्य विकल्पों पर विचार विमर्श कर सकता है।

स्वप्न दोष (Night fall) कोई बीमारी नहीं है

मुझे कई सवालों भरे मेल आए जिसमें से 60 फीसदी सवालों में स्वप्न दोष बंद करने की जानकारी मांगी गई थी या फिर उसका कोई इलाज पूछा गया था कुछ ने तो यहां तक बताया कि जिस डॉक्टर से वे इलाज करा रहा है उसकी दवा काफी महंगी है कुछ उपाय बताएं कि स्वप्न दोष न हो... आदि-आदि... इससे यह पता चलता है कि आज की युवा व किशोर पीढ़ी किस हद तक अज्ञानता की शिकार है. ये स्वप्न दोष जैसी सामान्य शारीरिक क्रिया को बीमारी मान लेते हैं और नीम हकीम इसी का नाजायज फायदा उठा कर युवाओं को ठगते हैं. यहां हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि स्वप्न दोष कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक सामान्य शारीरिक क्रिया है. चूंकि शरीर में वीर्य का सतत् निर्माण होता रहता है और शरीर से यह वीर्य बाहर सिर्फ तीन तरीकों से आता है-

1. सेक्स द्वारा
2. हस्तमैथुन द्वारा
3. स्वप्न दोष द्वारा
अब यदि सेक्स व हस्तमैथुन द्वारा वीर्य शरीर से बाहर नहीं आता है तो सामान्यतौर पर यह स्वप्न दोष के तरीके से शरीर से बाहर आता है. इसलिये जो लोग सेक्स या हस्तमैथुन नहीं करते हैं या काफी अंतराल में करते हैं उन्हे स्वप्न दोष की शिकायत हो सकती है. लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया है. दरअसल जब किशोर में वीर्य बनने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है तो उससे बाह्य तौर पर जानकारी तो नहीं मिलती साथ ही जब उसका शुक्राशय वीर्य से भर जाता है तो वह वीर्य बाहर आ जाता है और अज्ञानता वश वे इसे कोई बीमारी समझ लेते हैं जबकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है. विज्ञान के नजरिये से देखा जाय तो यदि आपके शरीर में वीर्य बनना प्रारंभ हो गया है और आप सेक्स या हस्तमैथुन नहीं करते उसके बाद यदि स्वप्न दोष नहीं होता तो यह चिंता की बात हो सकती है.
इनके अलावा कब्ज होने पर भी स्वप्न दोष हो सकता है लेकिन यह साधारण समस्या है जो किसी भी योग्य चिकित्सक द्वारा कुछ दिनों में ही ठीक किया जा सकता है.

Sunday, March 09, 2008

45 प्लस में महिला कैसे रहें चुस्त-दुरुस्त

मेनोपॉज को लेकर स्त्रियों में बहुत सी भ्रांतियां हैं। कुछ समझती हैं कि उनकी शारीरिक क्षमता कम हो रही है और वे बुढ़ापे की ओर अग्रसर हो रही हैं, तो कुछ मानती हैं कि मेनोपॉज उनके काम-सुख पर रोक लगाता है। जबकि ये भ्रांतियां वास्तविकता से कोसों दूर हैं। मेनोपॉज स्त्री की जनन क्षमता का अंत है, ना कि उसकी शारीरिक-क्षमता और काम-क्षमता का। मेनोपॉज के बाद स्त्री पूर्ण रूप से जीवन-सुख और काम-सुख का आनंद ले सकती है। सही मायने में देखें तो और अधिक आनंद ले सकती है, यदि वह थोड़ा-सा स्वयं को तैयार कर ले तो।

क्या होता है इसमें
मेनोपॉज में अंत:स्त्राव ग्रंथियों में परिवर्तन आता है। इसमें अंडाशय अब सामान्य मात्रा में एस्ट्रोजन हार्मोन बनाना कम कर देता है। यह उम्र के साथ होने वाली सामान्य प्रक्रिया है। कभी-कभी किसी असामान्य बाह्य प्रभाव से भी अंडाशय के कार्यो पर प्रभाव पड़ता है या फिर गर्भाशय निकाल दिए जाने पर भी मेनोपॉ़ज हो जाता है। हार्मोन्स के असंतुलन से भी मेनोपॉ़ज हो सकता है। सामान्यतया मेनोपॉ़ज की इस प्रक्रिया के प्रति यदि हम अपनी सोच सामान्य रखें तो इसे एंजॉय कर सकते हैं। वे स्त्रियां जो संतुलित आहार वाली जीवन शैली व स्वास्थ्य की धनी हैं, उनमें मेनोपॉज जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में आता है और जीवन सुखद रूप से चलता रहता है। वहीं वे स्त्रियां जो अपने खानपान का ध्यान नहीं रखतीं, अनियमित जीवन शैली अपनाती हैं उनमें मेनोपॉज एक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक अस्थिरता ले कर आता है। उनमें मेनोपॉज के साथ-साथ हॉट फ्लैश, नाइट स्वेटिंग, अनिद्रा या इनसोमेनिया, अनियमित पीरियड्स, काम-इच्छा का लुप्त होना, बहुत जल्दी थकान, सिरदर्द, चक्कर आना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं। भारी शरीर वाली व अगतिशील स्त्रियों में गर्भाशय एवं स्तन कैंसर की संभावनाएं भी अधिक होती हैं। करें भावनात्मक तैयारी जब लड़की किशोरावस्था में प्रवेश कर रही होती है तो मां उसे होने वाले परिवर्तनों जैसे पीरियड्स के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करती है, जिससे वह इन परिवर्तनों से विचलित न हो। फिर मेनोपॉज के समय हम स्वयं को शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक रूप से तैयार कर जीवंत क्यों न बनाएं। जीवन की नई शुरुआत स्त्रियों में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों के साथ-साथ यदि संतुलित आहार, नियमित जीवन शैली व व्यायाम का ध्यान रखा जाए तो मेनोपॉज एक नए जीवन की शुरुआत हो सकती है। अनुसंधान सिद्ध करते हैं कि जिन स्त्रियों में फिटनेस लेवल कम होता है उनमें मेनोपॉज से संबंधित परेशानियां अधिक देखने को मिलती हैं। जो स्त्रियां सप्ताह में कम से कम तीन घंटे व्यायाम करती हैं, वे फिट रहती हैं। उच्च उत्तेजक व्यायाम मेनोपॉज के पश्चात् भी अस्थियों की घनत्वता बनाए रखने में सहायक होते हैं। व्यायाम जनन मांसपेशियों में कैंसर प्रतिरोधक का कार्य तो करता ही है, साथ ही मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावनाओं को भी कम करता है। ऐसी स्त्रियों को अपने आहार में प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटमिन ई और डी, पेंटोथिक एसिड आदि अवश्य लेने चाहिए। यदि हॉट फ्लैश आते हैं तो सोया, साबुत अनाज, बींस तथा विटमिन ई सहायक होते हैं तो कैल्शियम व विटमिन डी ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव में। संतुलित आहार जरूरी अपने आहार में हरी सब्जियां, सैलेड, फल, बिना वसा का दूध, अंकुरित अनाज, पनीर, सोयाबीन आदि अवश्य शामिल करें। प्राकृतिक चिकित्सा में कहा गया है कि 60-90 मिली. चुकंदर का रस दिन में तीन बार लिया जाना मेनोपॉज में होने वाले असंतुलन को संतुलित करता है।

क्या करें, क्या न करें
1. अपने शरीर के वजन (1 ग्राम प्रति किलोग्राम) के अनुपात में वसा का सेवन करें, उससे अधिक नहीं। इसमें प्राकृतिक वसा भी सम्मिलित है। उदाहरण-50 किलोग्राम वजन की स्त्रियों को कुल 50 ग्राम वसा एक दिन में लेनी चाहिए।
2. छोटे-छोटे आहार पांच बार लें।
3. रोज 1.5 से 2 लीटर तरल पदार्थो का सेवन करें (पानी के अतिरिक्त)।
4. खाद्य पदार्थो को कम पानी व कम वसा में हलका पकाएं।
5. ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें।
6.एनिमल फैट के स्थान पर वेजटेबल फैट का प्रयोग करें।
7. साबुत अनाज का अधिकतम सेवन करें, वे पौष्टिक तत्व तथा फाइबर प्रदान करते हैं।
8. मिठाई तथा रिफाइंड शुगर का कम से कम सेवन करें। जो भी खाएं या पिएं खुश होकर उसका सेवन करें, स्वाद लेकर खाएं साथ ही जीने के लिए खाएं, खाने के लिए न जिएं।

उपयोगी है एक्सरसाइज
व्यायाम एवं नियमित जीवन शैली के लिए सबसे पहले यह जानें कि आपके शरीर की क्या आवश्यकता है। आइए अब जानें आप क्या-क्या कर सकती हैं-
1. योग में सूर्य नमस्कार, पवनमुक्तासन द्वितीय एवं तृतीय अवस्था, धनुरासान, सर्वागासन, हलासन, मतस्यासन, पश्चिमोत्तानासन एवं संतुलन आसन करें। ये सभी आसन यदि कमर दर्द हो तो बिना विशेषज्ञ की सलाह एवं देखरेख के न करें।
2. मुद्राओं में अश्विनी, वजरौली, महामुद्रा एवं महाभेद मुद्रा लाभकारी है। उडि़यान बंध एवं मूल बंध संबंधित मांसपेशियों को सुदृढ़ करते हैं। इनके अतिरिक्त योग निद्रा एवं अंतर मौन लाभकारी हैं। ब्रह्म मुहूर्त का विशेष लाभ उठाएं।
3. एक्सरसाइज में कॉर्डियो, रेजिस्टेंस तथा फ्लेक्सिबिलिटी एक्सरसाइज को सम्मिलित करें। इन सभी की नियमितता, उत्तेजकता, समयावधि एवं प्रकार आपके अपने शरीर के अनुरूप होनी चाहिए। यद्यपि यह सब विशेषज्ञ की सलाह पर करना चाहिए, फिर भी एक ऐसी स्त्री जो व्यायाम के लिए नई है, साथ ही मेनोपॉज के दौर से गुजर रही है, उसके लिए एक एक्सरसाइज सेशन का उदाहरण प्रस्तुत है -व्यायाम का एक सेशन 45 मिनट का होना चाहिए, जिसमें 5-10 मिनट वॉर्म अप (उत्तेजक व्यायाम) करें, इसके अंतर्गत लो इन्टेसिटी वॉकिंग (हलकी उत्तेजक वॉकिंग) कर सकती हैं। इसके बाद लगातार लगभग 20 मिनट तेज (ब्रिस्क) वॉक करें (अपनी क्षमतानुसार गति रखें)। जिस गति में आप स्वाभाविक हैं, उस गति को लगातार 20 मिनट तक बनाए रखें। इसी गति में बिना विराम लिए 10-15 मिनट में वॉकिंग को धीमा करते हुए निम्न अंगों व कमर की स्ट्रेचिंग करते हुए समाप्त कर दें। इसमें लेग स्ट्रेच, कॉफ स्ट्रेच, ट्रंक रोटेशन, एंकल रोटेशन, बेन्डिंग स्ट्रेच आदि सम्मिलित करें। यह स्ट्रेचिंग अपनी क्षमतानुसार करें। यह सेशन सभी स्त्रियां कर सकती हैं। विशेषज्ञ की सलाह पर आप अपने लिए एक्सरसाइज बैटरी भी तैयार करवा सकती हैं जो आपके लिए सही मायने में रामबाण का कार्य करेगी। अपने मस्तिष्क से यह भ्रम निकाल दें कि यदि आपको गर्भाशय से संबंधित या अन्य कोई और अस्वस्थता है तो आप व्यायाम अथवा योग नहीं कर सकतीं। ऐसे में फिटनेस एक्सपर्ट एवं डॉक्टर की सलाह से आप अपने को चिरयौवन प्रदान कर सकती हैं।

(यह मैटर मेल द्वारा ब्लाग मित्र ने भेजा है)

Monday, March 03, 2008

परिवर्तन जो उम्र के साथ होते है

अपने पहले लेख के साथ कई लोगों के विचार जानने को मिले जिससे यह कहा जा सकता है कि ज्यादातर लोगों (युवा व प्रोढ़ों) का यह सोचना या मानना है कि जैसे-जैसे वृद्धावस्था आती जाती है वैसे-वैसे लोगों की उस अनुरूप सेक्सुअल समीपता कम होती जाती है. जबकि हकीकत में ऐसा हर किसी के साथ नहीं होता. बल्कि यह कह सकते हैं कि सीनियर सेक्स एक आनंददायी व जीवन के पड़ाव का अहम् हिस्सा होता है, कई बार तो यह 60 वर्ष के उपर भी शानदार रूप में देखने को मिलता है. इस मुकाम पर देखा यह जाता है कि जब बूढ़ी चिंगारी अपने आप को उस तरह से प्रस्तुत नहीं कर पाती जैसा कि वह पहले करती थी तो वे मानसिक रूप से स्वयं को सेक्स अक्षम मानने की ओर चल पड़ते हैं. इस स्थिति में चाहिये कि आप अपनी मानसिक व शारीरिक अभिलाषा-कामना-आकांक्षा की पूर्ति के लिये एक समीपता भरी शाम की प्लानिंग करें. यहां आप अपने घर-परिवार-काम व उम्र के तनाव से दूर अपने पार्टनर के साथ शुरुआत करें तथा उससे अपनी भावनाएं व सेक्सुअल मामलों पर चर्चा करते हुए उसे भी सेक्स के लिये तैयार करें. धीरे-धीरे माहौल अपने आप हल्का होते हुए उत्तेजक होता जाएगा और आप इस उम्र में भी उस चिंगारी को पा लेंगे. हां यह बात अलग है कि अब आपका समय थोड़ा सा बढ़ जरूर जाएगा लेकिन आनंद में शायद वृद्धि ही होगी. इस प्रकार सीनियर सेक्स के मामले में आप जितनी ऊर्जा डालेंगे आप पाएंगे कि सीनियर सेक्स के आश्चर्यजनक पहलू सामने आने लगे हैं, जो युवावस्था में नहीं थे.


महिलाओं में परिवर्तन
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महिलाओं में मूलरूप से सेक्सुअल परिवर्तन मेनोपाज के साथ होने लगते हैं और उनकी सेक्सुअलटी कई तरीकों से प्रभावित होने लगती है. इस दौरान महिलाओं में एस्ट्रोजेन हार्मोन का लेबल घटने से उनकी शारीरिक सेक्स उत्तेजना पर सीधा असर पड़ने लगता है.

० प्राकृतिक रुप से स्निग्धता(Lubrication) काफी कठिनाई से मिलती है.

० योनि का लचीलापन (flexible) कम हो जाता है जिससे संभोग कुछ पीड़ादायी होने लगता है.

इसलिये सेक्सुअल आराम (comfort) व आनंद को बढ़ाने या कायम रखने के लिये जरूरी है कि कृत्रिम (artificial ) स्निग्धक (lubricant ) प्रयोग करें. सेक्स के दौरान वहीं क्रियाएं चयन करें जो आप दोनो के शरीर व उम्र के अनुरूप तथा शारीरिक रुप से आरामदायक हों. इसके अलावा आप यह विचार लेकर चले कि आप प्रशिक्षु सेक्स एथलीट है तथा इस आधार पर नित नए आइडिया खोजने का प्रयास करें. इन सबके बाद भी आप लगातार आनंददायी संभोग के लिये नियमित परेशानी झेल रहे हैं तो बेहिचक किसी सेक्सोलॉजिस्ट / चिकित्सक से संपर्क करें.


पुरुषों में परिवर्तन
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पुरुषों में परिवर्तन के लिए जिम्मेदार होता टेस्टोस्टेरॉन हारमोन में कमी आना. इस अवस्था में उत्थान को पाना और बनाए रखना काफी मुश्किल होता है.

० इस दौरान आप सेक्स क्रिया को आसान बनाने अपनी सेक्स पोजीशन में परिवर्तन करें.

० अपने आप में मानसिक बुढ़ापा न आने दें.

० चाहें तो उत्थानशील सहारों का प्रयोग चिकित्सक की सलाह से कर सकते हैं. वियाग्रा, वस्कुलर(vascular) सर्जरी या अन्य कोई साधन चिकित्सक की सलाह व निर्देशन में लिये जा सकते है.
इलाज
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उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इनमें से ज्यादातर बीमारियां संधिशोथ(arthritis), हृदय संबंधी बीमारियां, मधुमेह(diabetes) आदि प्रमुख हैं. इन बीमारियों के इलाज में जो औषधियां प्रयुक्त होती है उनका कई बार सेक्स क्षमताओं के रूप में साइड इफेक्ट होता है. ऐसे में जब आप किसी इलाज विशेष के दौरान सेक्स क्षमताओं पर प्रभाव देखें तो बेहिचक तुरंत चिकित्सक से मिलें. इससे इस बात की काफी संभावना रहती है कि दवाओं में सुधार या परिवर्तन से यह परेशानी सहज ही दूर हो सकती है साथ ही यदि कोई दूसरा मामला भी है तो वह भी सामने आ सकता है. जिसके उचित इलाज से सेक्स क्षमताएं पुनः तीव्रता को पा सकती है.

इन्हें भी आजमाएं
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लगातार संवाद करें
अपने पार्टनर से भावनात्मक व मानसिक तौर पर निकट आने का सबसे बढ़िया जरिया है बातचीत, साथ ही यह शारीरिक संबंधों की निकटता के लिये भी अत्यावश्यक है. अपने पार्टनर से अपनी सेक्सुअल जरूरतों और अपेक्षाओं पर चर्चा करने से न घबराएं और न ही संकोच करें. यदि यह सबकुछ आप बगैर आक्रामकता के नियमित तौर जारी रखते हैं तो आप पाएंगे कि इस अवस्था में भी आपकी सेक्स लाइफ शानदार है, लेकिन अपने पार्टनर से संवाद लगातार जारी रखें. इसके अलावा यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अपने पार्टनर की जरूरतें, अभिलाषाएं और दिलचस्पी किस पर और कितनी है. इस आधार पर आप उसकी संपूर्णता को समझेंगे तो निश्चित तौर पर शारीरिक क्रिया कलापों की पूर्ति निहायत ही शानदार होगी.

देऱ न करें
यदि अभी तक आपने अपनी सेक्सुअल लाइफ में कोई उत्साहजनक(adventurous) कार्य नहीं किया है तो आपके लिये यह सब करने का यह शानदार समय है. साधारण रुप में भी नए स्थान व नई पोजीशन के साथ कुछ गतिविधियां आपकी सीनियर सेक्स लाइफ में कुछ अद्भुत क्षण मिलेंगे. लेकिन यहां यह
महत्वपूर्ण है कि इस दौरान आप अपनी और अपने पार्टनर की शारीरिक सीमाओं(physical limitations ) का ध्यान अवश्य रखें.

दुरुस्त रहने का प्रयास करें
उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक परिवर्तन तेजी से होते हैं. इस लिये उम्रदराज होने के बाद भी सेक्स लाइफ स्वस्थ रखने के लिये जरूरी है कि शारीरिक तदुरुस्ती(physical fitness ) बनाने नियमित रुप से प्रयास करें. संयत व्यायाम और संतुलित भोजन उम्र बढ़ने के बाद भी आपकी सेक्सुअल लाइफ को सटीक रखने में सहायक होगा साथ ही उत्प्रेरक का भी काम करेगा. इन सबके बीच अपने चिकित्सकीय स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें. इस दौरान उन सभी गतिविधियों में सहभागिता निभाएं जिनसे आपका मन प्रसन्न तथा दिमाग तनाव मुक्त रहता है. लेकिन उस चीजों तथा बातों से ज्यादा से ज्यादा दूर रहने की कोशिश करें जो आपको उदासी-ग्लानि-विषाद(depression) में डालें. यह स्थिति सेक्स लाइफ के लिये खतरनाक मानी गई है.


क्रमशः

Tuesday, February 26, 2008

ढलती उम्र और सेक्स

उम्र और सेक्स अपने आप में काफी बड़ा मामला है लेकिन इसमें जो सबसे बड़ी बात निकल कर सामने आती है वह यह कि जैसे जैसे उम्र ढलती जाती है वैसे-वैसे सेक्स की क्षमता कम होती जाती है. शायद कई लोग तो यह भी कह देते हैं कि एक उम्र के बाद लोग सेक्स के काबिल भी नहीं रहते जबकि यह गलत है. यह सही है कि उम्र और सेक्स का गहरा नाता है वहीं सबसे जरूरी है विषय के बारे में जानकारी. ज्यादातर लोग अपने अधकचरे ज्ञान या कई बार अज्ञानता की वजह से ढलती उम्र में सेक्स को सही नहीं मानते. खैर यह सब तो बाते है अब आते हैं मूल विषय में - यह सही है कि ढलती उम्र में सेक्स युवा दिनों के सेक्स के समान तो नहीं होता है लेकिन उसे पूर्ण संतोषजनक बनाया जा सकता है. अगर यह कह दें कि सेक्स के लिये उम्र की कोई बाध्यता नहीं है बस जरूरत है तो थोड़ी सी जागरुकता की. एक बेहतर सेक्स लाइफ का आशय सिर्फ चरम उत्कर्ष मात्र से नहीं लगाया जाना चाहिये बल्कि इसमें बेहतर स्वास्थ्य व स्वाभिमान भी शामिल होता है. इसलिये उम्र बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य व स्वाभिमान पर भी ध्यान दें तो इस अवस्था में भी आप शानदार व संतोषजनक सेक्स लाइफ का आनंद उठा सकते हैं. कई बार तो यह भी देखा गया है कि लोग 80 साल की उम्र में भी शानदार सेक्स लाइफ गुजार रहे होते हैं. इस लिये यह भूल जाइये कि सेक्स सिर्फ युवाओं के लिये हैं. फिर सवाल उठता है कि उम्र के साथ क्या परिवर्तन आते हैं?

पुरुषों में टेस्टॉस्टेरॉन का स्तर कम होता है जिससे लोगों की सेक्स के प्रति रुचि कम होती है साथ ही अवस्था के अनुरूप सेक्स क्षमता में भी कुछ कमी आती है. उत्थान(erection) व चरमोत्कर्ष - कामोन्माद(orgasm) के लिये काफी पहले की अपेक्षा काफी उकसावे(stimulation) की जरूरत होती है. रति निष्पत्ति जल्दी हो जाती है. स्खलन कम शक्तिशाली हो जाता है तथा वीर्य भी कम मात्रा में निकलता है. तथा एक स्खलन के पश्चात दूसरे उत्थान के लिये काफी लंबा समय लगता है. इसके अलावा व्यक्ति का स्वास्थ्य भी बेहतर सेक्स लाइफ का सबसे बड़ा इम्पैक्ट या मूल्यांकन होता है. यदि आप या आपका पार्टनर का स्वास्थ्य कमजोर है या फिर काफी समय से हृदय संबंधी बीमारी या संधिशोथ (arthritis) से पीड़ित हैं तो बढती उम्र के साथ सेक्स और चैलेन्जिंग होता जाता है. वहीं कुछ सर्जरी तथा औषधियां जैसे ब्लड प्रेशर, एन्टीहिस्टामीन, एन्टी डिप्रेशेन्ट सहित एसिड ब्लोकिंग की दवाएं भी सेक्सुअल प्रणाली पर प्रभाव डालती हैं. इस लिये इस उम्र में शारीरिक अवस्था में हो रहे परिवर्तन के अनुरूप अपनी सीमाएं जाननी चाहिये इसलिये महज सुने सुनाए सगूफे के आधार पर ढलती उम्र में अपनी सेक्स लाइफ का सहज निर्धारण न करें बल्कि जरूरत हो तो अपने चिकित्सक से भी बात करें साथ ही अपने पार्टनर से भी लगातार बात करनी चाहिये. 40 वर्ष या फिर उससे ज्यादा के होने पर सेक्स लाइफ में कुछ स्वाभाविक परिवर्तन आने लगते है. इस दौरान भी बेहतर सेक्स लाइफ बनाए रखने के लिये जरूरी है कि अपने पार्टनर से ज्यादा से ज्यादा इस बारे में बात करें. सेक्स को लेकर पार्टनर की राय क्या है इसपर खुलकर बात करनी चाहिये. ज्यादतर उम्रदराज लोग इस उम्र में सेक्स चर्चा को असंगत व निषिद्ध मानते हैं. जबकि पार्टनर से खुली सेक्स चर्चा (जिसमें आपकी जरूरतें , पसंद, अभिलाषा व कमजोरी) करनी चाहिये. इससे आप एक दूसरे के और ज्यादा करीब आते हैं साथ ही बेहतर सेक्स लाइफ गुजारने में भी काफी मदद मिलती है.
क्रमशः